आज शाम ७:४५ की बात है .... मैं अपने बाईक पर मार्केट से घर आ रही थी .... सड़क पर लाईट होते हुए भी कुछ अन्धेरा -सा दिख रहा था ! मैंने देखा एक लड़का जो की १९-२० वर्ष का रहा होगा वो सभी गाडियों को लिफ्ट के लिए रोक रहा था किन्तु गाडिया उसकी और ध्यान न देते हुए अपनी स्पीड में आगे बढ़ जाती थी ! उसने मेरी भी बाईक को देख कर लिफ्ट के लिए अपना हाथ आगे बढाया किन्तु लड़की देखकर उसने अपने बढे हुए हाथ को संकोच से पीछे कर लिया ! लड़के न तो आम तौर पर किसी से लिफ्ट मांगते है और न ही उन्हें कोई लिफ्ट देता है , फिर यह क्यों ??
कुछ ही दूर चौराहे पर रेड लाईट हो रखी थी ..... मैंने अपनी बाईक रोकी , पीछे मुड़कर देखा .... वह लड़का बड़े ही धीमे-धीमे कदमो से आगे चलता हुआ उम्मीदों से सभी की ओर अपने हाथ बढ़ा रहा था ..... और ध्यान से देखा मैंने उसके सर पर पट्टी बंधी हुई थी .... कदमो में थकावट या दर्द था , चेहरे पर परेशानी स्पष्ट झलक रही थी !
'' यह लड़का तो अभी ग्रेजुएशन में होना चाहिए .... बीए / बी कॉम वालो के तो अभी एक्जाम चल रहे है .... इस समय जाने कैसे चोट लगी होगी इस बिचारे को .... रिक्शे से भी तो जा सकता है ..... क्या पता इसके पास पैसे न हो " ! जाने कितने सवाल ज़ेहन में उठ रहे थे ... उसने भी मुझे रुके हुए अपनी तरफ देखते हुए देख लिया था ! वह संकोच से धीरे-धीरे चलता हुआ मेरे पास आया ... मैंने उससे कुछ भी नही कहा लेकिन उसने मेरी खामोश स्वीकृति को समझा और धीरे से बाईक पर बैठ गया !

"कहाँ जाना है ?"
"**** कोलेज के हास्टल "
(उफ़, माँ -पिताजी से दूर रहता है, एक्जाम भी चल रहे होंगे.. ऊपर से चोट भी )
"मुझे रास्ता नही मालूम .... बता देना !"
"रेड लाईट से राईट फिर आगे जाकर लेफ्ट "!
"अभी तो एक्जाम चल रहे होंगे ?"
"जी "
"इस समय अपना ख़याल रखना चाहिए था न .... ये चोट कैसे लगा ली ?"
"जी , मैं फुटपाथ पर जा रहा था ... तभी एक कार वाले ने अचानक अपना दरवाजा खोला और मेरे मेरे सर पर ये चोट लगी " !
"क्या करते हो ?"
"बोटनी ओनर्स ... 2yr .. "
"नाम ?"
"मिरज़ा "

थोड़ी ही देर में उसका होस्टल आ गया ... वहाँ काफी लड़के खड़े थे ...... उसने उतर कर मेरी और कृतज्ञता से देखते हुए धन्यवाद कहा .... मैंने ज़ा हेलमेट लगा रखी थी, मैंने अपना हेलमेट उतारा नही .... और चुपचाप अपनी बाईक आगे बढ़ा ली .... !!


__ किरण श्रीवास्तव '' मीतू'' Copyright © .. 13-5-2012 .. 9 :22 pm
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फोटो मेरे कैमरे से ...:)

22 Responses to "रंग जिंदगी के !"

  1. nirmesh Says:

    apki sari dile tammana puri ho

  2. Raj kiran Says:

    hello meetu, first thing, aap bahut achha likhati ho, sochti achha ho, the main thing is that you are realy a very nice girl by your attitude. i like it.

  3. kulwant mittal agra Says:

    we salute to u ........
    we proud on u..........
    god bless u my friend......

  4. Rajesh Mishra Says:

    AAP ACHCHHA LIKHTI TO HAI HI,ACHCHHE BICHAR AUR SANSKAR BHI HAI.AAPKI YAH BAHUGUNI PRATIBHA AUR KISI KO PASAND HO ATHVA NA HO PARANTU MUJHE BAHUT BHATI HAI.AAPKE SANSMARAN DIL KO CHHU JAATE HAI.Rajesh Kumar Mishra "Raj"

  5. a k mishra Says:

    वाह....बहुत ही अच्छा काम किया आपने ..किरण जी...इंसानियत का परिचायक आपका यह व्यव्हार आजकल के बड़े शहरों से समाप्त ही होता जा रहा है..लेकिन आप एक सहृदय कविह्रदय लड़की हैं..आपका ह्रदय तो संवेदनाओं से भरा ही हुआ है..आपने हमेशा ही ऐसी परिस्थितियों में लोगों की मदद की है...वह छात्र सच में ह्रदय से आपको धन्यबाद दे रहा होगा...दूसरों की मदद कभी भी बेकार नहीं जाती...इसका प्रतिफल जीवन में अच्छा ही होता है..ईश्वर सब देखता है..यह पुनीत कार्य करके आपके दिल में कितना संतोष महसूस हो रहा होगा....यह मैं समझ सकता हूँ....
    अपने लिए तो सब करते हैं अपने लिए जीते हैं
    जो दूसरों के काम आयें सच्चे इंसान तो वही हैं !!!
    मुझे आप जैसे दोस्त पर गर्व है...:)

  6. संजय मेहता Says:

    आज के युग में आदमी का आदमी से विशवास उठ गया है. इंसान का इंसानियत से विशवास उठ गया है. लिफ्ट देने से पहले मन में इतने वहम् घर कर जाते है कि ना जाने लिफ्ट मांगने वाला कौन है? कही मुझे कुछ कर ना दे आदि आदि ... उस युवक ने विशवास भरी नजर से आपकी ओर देखा एवं आपने इंसानियत में उस युवक के विशवास को आहत नहीं होने दिया...आज मानवता - इंसानियत आप जैसे चंद लोगो की वजह से ही टिकी हुई है ! साधुवाद !

  7. अखिलेश्वर पाण्डेय Says:

    बहुत अच्छा.

  8. JITENDRA KUMAR Says:

    I have seen many incident when a girl helped out by a boy,but its rare to see a girl help a boy in such a situation when it wont possible in normal course.but u have a big heart and courage to help, made the rare incident possible....i respect your attitude n helping nature .....keep it ....i like it...hats off .....

  9. Krishna Kumar Limboo Says:

    It was kind of you to help an injured boy. Here, you have given an example of how even a girl of your age could help an unknown boy, irrespective of his caste and creed, and drop him at his destination. I can understand your sensibility and sensitivity towards and affection for an injured and stranded boy, who, despite his requests to passing bikes and cars, couldn't get the kind of assistance that you could extend him. Bravo!

  10. beautifulsoul Says:

    It was kind of you to help a boy and drop him at his destination. I appreciate your demonstration of human sensibility, sensitivity towards and affection for the boy who couldn't get the kind of help, despite his efforts to get help from the passing cars and bikes. You deserve kudos. Bravo!

  11. Ashutosh Mishra Says:

    meetu ji aap ka blog pad kar achchha laga ,apke vichar nek hai ap lakho me ek hai ,

  12. sun-mitwa Says:

    APNA SA SAMAJHA TUMNE PARAYE KE DARD KO ,DOORIA BADHAYE FAR DE USH FARD KO,
    SAMVEDNA KO MAUN SVIKRIT
    DHANYA KI ADHIKARI HAI,AAP JAISA MILA NA KOI ,KHOJ ABHI TAK JARI HAI.

  13. murari singh Says:

    aapke subd chitra aapke prati sochne ko vivash karta hai. accha likhti hain. wahi accha likhta hai jismen smvedna jivit hain. behtar... lagi rahen

  14. vishad Says:

    नेक एवं अच्‍छे सोच के लिए आपको को धन्‍यवाद देता हँ

  15. Kulwant Happy "Unique Man" Says:

    यादगार दिनों में यह दिन भी शुमार हो जाएगा।

  16. Sazid Says:

    Sabse pahle to aap dil ki bahut saaf hai, jo dil dimag me aata hai wohi aap bade hi pyar se gaur karke likhti hai, aur jo v likhti hai wo ek umeed aur biswas par tiki hati hai so nice ,aap aur likhiye aur aage hamesha badhte rahiye, best wishes for you by me @Sazid

  17. Sazid Says:

    bahut ache

  18. Prakash Jaiswal Says:

    Tumne bhahut aacha kaam kiya .... I like ...very nice..

  19. avinashramdev Says:

    carry on sahayate ke liye hamesha tayar raye

  20. avinashramdev Says:

    sahayata ke liye sadev tayar rahe

  21. Ravi Thakur Says:

    wah wah wah kiran ji sadhuvaad dena chaahunga aapko ... yadi yah kahaani nahi hai to aap waqai shraddha ki paatr hain ... mera naman aapko..

  22. Ravi Thakur Says:

    wah wah wah kiran ji wah .... sadhuvaad denaa chaahunga aapko ...yadi yah kahaani nahi hai to waqai aap shraddha ki paatr hain ... mera naman ... agar .... kahaani hai to bhi achchhi ban padi hai ... wah

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  • संवेदना

    क्यों लिखती हूँ नहीं जानती, पर लिखती हूँ... क्योकि महसूस करना चाहती हूँ प्रेम-पीड़ा-परिचय-पहचान! तन्हाई में जब आत्म मंथन करती हूँ तो व्यक्तिगत अनुभूतियाँ, अनुभव मेरी अभिव्यक्ति का माध्यम बनकर कविता का रूप ले लेती है!! ---किरण श्रीवास्तव "मीतू" !!

    अपने दायरे !!

    अपने दायरे !!
    कुछ वीरानियो के सिलसिले आये इस कदर की जो मेरा अज़ीज़ था ..... आज वही मुझसे दूर है ..... तल्ख़ हुए रिश्तो में ओढ़ ली है अब मैंने तन्हाइयां !! ......... किरण "मीतू" !!

    स्पंदन !!

    स्पंदन !!
    निष्ठुर हूँ , निश्चल हूँ मैं पर मृत नही हूँ ... प्राण हैं मुझमे ... अभी उठना है दौड़ना हैं मुझे ... अपाहिज आत्मा के सहारे ... जीना है एक जीवन ... जिसमे मरण हैं एक बार ... सिर्फ एक बार !! ..... किरण " मीतू" !!

    सतरंगी दुनिया !!

    सतरंगी दुनिया !!
    आस-पास , हास-परिहास , मैं रही फिर भी उदास ...आत्मा पर पड़ा उधार , उतारने का हुआ प्रयास ... खुश करने के और रहने के असफल रहे है सब प्रयास !! ..... किरण "मीतू" !!

    उलझन !!

    उलझन !!
    अकेले है इस जहां में , कहाँ जाए किधर जाए ! नही कोई जगह ऐसी की दिल के ज़ख्म भर जाए !! ... किरण "मीतू" !

    तलाश स्वयं की !!

    तलाश स्वयं की !!
    कुछ क्षण अंतर्मन में तूफ़ान उत्पन्न कर देते है और शब्दों में आकार पाने पर ही शांत होते है ! ..... मीतू !!

    ज़ज़्बात दिल के !

    ज़ज़्बात दिल के !
    मंजिल की तलाश में भागती इस महानगर के अनजानी राहो में मुझे मेरी कविता थाम लेती है , मुझे कुछ पल ठहर जी लेने का एहसास देती है ! मेरी कविता का जन्म ह्रदय की घनीभूत पीड़ा के क्षणों में ही होता है !! ..... किरण "मीतू" !!

    मेरे एहसास !!

    मेरे एहसास !!
    मेरे भीतर हो रहा है अंकुरण , उबल रहा है कुछ जो , निकल आना चाहता है बाहर , फोड़कर धरती का सीना , तैयार रहो तुम सब ..... मेरा विस्फोट कभी भी , तहस - नहस कर सकता है , तुम्हारे दमन के - नापाक इरादों को ---- किरण "मीतू" !!

    आर्तनाद !

    आर्तनाद !
    कभी-कभी जी करता है की भाग जाऊं मैं , इस खुबसूरत ,रंगीन , चंचल शहर से !! दो उदास आँखे .....निहारती रहती है बंद कमरे की उदास छत को ! . ..लेकिन भागुंगी भी कहाँ ? कौन है भला , जो इस सुन्दर सी पृथ्वी पर करता होगा मेरी प्रतीक्षा ? ..... किरण "मीतू" !!

    मेरा बचपन - दुनिया परियो की !

    मेरा बचपन - दुनिया परियो की !
    प्रकृति की गोद में बिताये बचपन की मधुर स्मृतियाँ बार-बार मन को उसी ओर ले जाती है ! मानव जीवन में होने वाली हर बात मुझे प्रकृति से जुडी नज़र आती है तथा मैं मानव जीवन तथा प्रकृति में समीकरण बनाने का प्रयास करती हूँ !....किरण "मीतू

    कविता-मेरी संवेदना !!

    कविता-मेरी संवेदना !!
    वेदना की माटी से , पीड़ा के पानी से , संवेदनाओ की हवा से , आँसूवो के झरनों से ! कोमल मन को जब लगती है चोट , निकलता है कोई गीत , और बनती है कोई कविता !! ..... मीतू !!
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