_____________________आत्ममंथन __________________
जाने क्यों आज खुद के ही नाम ख़त लिखने का ख़याल आ गया ! लिखने के लिए कलम उठाई तो गुज़रे हुए जाने कितने लम्हों की यादे सिमट आई ज़ेहन में .....कई हँसते हुए मुकाम भी शामिल हो गए खयालो में , तो चुप-चुप से पलो में घुटती हुयी कई खामोश-सी साँसों की तड़प भी रुला गयी ...... कभी हथेलिओ में चाँद... नज़र आया तो कभी चाहते हुए भी कुछ न कर पाने की कसक होंठो में कैद होकर रह गयी ..... ख्यालो के चिराग जलते रहे और मैं बीती यादो के कोरे पन्नो पर समेटते हुए अपने हिस्से की ज़मीन तलाशने लगी ........"मनचाहा तो किसी को नही मिलता , पर जो मिला . उसका भी मलाल नही है "! वैसे भी अपना वजूद अपनी जमीन तलाशना हर किसी के लिए जरुरी भी तो है ......ताकि बीती हुयी गलतियों को सुधार जा सके , उनसे सीख ली जा सके ..... और अपनी उपलब्धियों से अपनी ख्वाहिशो का आसमान पा सके ......!!
मीतू २०:०९ ...१७०१२०११ ....Copyright ©
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12:15 AM

मैं हूँ एक इंसान !
मेरा व्यक्तित्व कितना महान !!

मैं नित्यानंद भी हूँ,
जो अपनी सेविकावों के साथ अश्लील कार्य करता हूँ !!

मैं इच्छाधारी बाबा भी हूँ जो ,
स्कूली लड़कियों से लेकर एयर -होस्टेस सब को
अपने रैकेट में शामिल कर लेता हूँ !

मैं वो साइबर कैफे भी हूँ ,
जहा स्कूली लड़कियां स्कूल जाने के बहाने आकर अपनी ड्रेस बदल कर ,
अपने बॉय फ्रेंड्स के साथ सारा दिन घूमने के बाद,
फिर से आकर और ड्रेस पहेन कर अपने घर वापस जाती हैं !!

मैं वो शमसान भी हूँ जो गवाह हैं ,
लावारिश लाशो के साथ हुए बलात्कार का !!

मैं वो मंदिर भी हूँ ,
जहा आगे निकलने की होड़ में ,
लोग अपनी मर्यादा लाँघ जाते हैं !!

मैं वो जेल भी हूँ ,
जहाँ यैयाशी के सारे सामान आसानी से उपलब्ध हैं !!

मैं वो T२० की हरी हुई टीम भी हूँ .
जिसे हारने के बाद भी 3 करोड़ मिलते हैं .
पता नहीं ये हारने का इनाम है या
उस देश में जाकर मौज मस्ती करने का !!

मैं वो जनता भी हूँ ,
जो ये जानती है की किये गए वादे झूठे हैं ,
पर फिर भी उसी पार्टी को वोट करती हूँ !!

मैं वो वाहन चालक भी हूँ ,
जो बिना हेलमेट के पकडे जाने पैर .
चालान कटवाने से ज्यदा 50/- देने मैं विस्वास रखता हूँ !!

मैं वो भाई वो पिता वो माँ भी हूँ ,
जो सिर्फ इसलिए अपनी बहिन /बेटी और
दामाद को मार देते हैं की विवाह विजातीय था !!

मैं वो व्यवस्था भी हूँ ,
जहा अच्छे काम करने
वालो का तुरुन्त ट्रान्सफर कर देती हूँ !!

मैं वो लो - वेस्ट जींस भी हूँ ,
जो बाइक पर बैठते ही
अपने अंत: वस्त्रो का प्रदर्शन करती हूँ !!

मैं वो नग्नता भी हूँ ,
जो अब सिनेमा पटल से उतर कर सडको पर चली आई हूँ

मैं वो मूर्ति भी हूँ ,
जिसे एक नेता ने अपने जीवत रहते हुते चौराहे पर लगवा दिया !!

मैं वो औरत भी हूँ
जिसे उसके प्रेमी ने विवाह के बहाने ,
कोठे पर ला कर बेच दिया !!

मैं वो नव -विवाहिता भी हूँ ,
जिसे उसके ससुराल वालो ने
कम दहेज़ लेन के कारन जिन्दा जला दिया !!

मैं वो पुत्र भी हूँ ,
जो जायदाद के लिए
अपने पिता का खून कर देता हूँ !!

मैं वो जल भी हूँ ,
जिसके लिए लोग खून तक कर रहे हैं !!

यह तो एक झलक भर है मेरे व्यक्तित्व का .. फिर भी
मैं हूँ एक इंसान ,
मेरा व्यक्तित्व कितना महान !!

दिनांक २९-६-२०१० .Copyright ©

7:56 PM
  • संवेदना

    क्यों लिखती हूँ नहीं जानती, पर लिखती हूँ... क्योकि महसूस करना चाहती हूँ प्रेम-पीड़ा-परिचय-पहचान! तन्हाई में जब आत्म मंथन करती हूँ तो व्यक्तिगत अनुभूतियाँ, अनुभव मेरी अभिव्यक्ति का माध्यम बनकर कविता का रूप ले लेती है!! ---किरण श्रीवास्तव "मीतू" !!

    अपने दायरे !!

    अपने दायरे !!
    कुछ वीरानियो के सिलसिले आये इस कदर की जो मेरा अज़ीज़ था ..... आज वही मुझसे दूर है ..... तल्ख़ हुए रिश्तो में ओढ़ ली है अब मैंने तन्हाइयां !! ......... किरण "मीतू" !!

    स्पंदन !!

    स्पंदन !!
    निष्ठुर हूँ , निश्चल हूँ मैं पर मृत नही हूँ ... प्राण हैं मुझमे ... अभी उठना है दौड़ना हैं मुझे ... अपाहिज आत्मा के सहारे ... जीना है एक जीवन ... जिसमे मरण हैं एक बार ... सिर्फ एक बार !! ..... किरण " मीतू" !!

    सतरंगी दुनिया !!

    सतरंगी दुनिया !!
    आस-पास , हास-परिहास , मैं रही फिर भी उदास ...आत्मा पर पड़ा उधार , उतारने का हुआ प्रयास ... खुश करने के और रहने के असफल रहे है सब प्रयास !! ..... किरण "मीतू" !!

    उलझन !!

    उलझन !!
    अकेले है इस जहां में , कहाँ जाए किधर जाए ! नही कोई जगह ऐसी की दिल के ज़ख्म भर जाए !! ... किरण "मीतू" !

    तलाश स्वयं की !!

    तलाश स्वयं की !!
    कुछ क्षण अंतर्मन में तूफ़ान उत्पन्न कर देते है और शब्दों में आकार पाने पर ही शांत होते है ! ..... मीतू !!

    ज़ज़्बात दिल के !

    ज़ज़्बात दिल के !
    मंजिल की तलाश में भागती इस महानगर के अनजानी राहो में मुझे मेरी कविता थाम लेती है , मुझे कुछ पल ठहर जी लेने का एहसास देती है ! मेरी कविता का जन्म ह्रदय की घनीभूत पीड़ा के क्षणों में ही होता है !! ..... किरण "मीतू" !!

    मेरे एहसास !!

    मेरे एहसास !!
    मेरे भीतर हो रहा है अंकुरण , उबल रहा है कुछ जो , निकल आना चाहता है बाहर , फोड़कर धरती का सीना , तैयार रहो तुम सब ..... मेरा विस्फोट कभी भी , तहस - नहस कर सकता है , तुम्हारे दमन के - नापाक इरादों को ---- किरण "मीतू" !!

    आर्तनाद !

    आर्तनाद !
    कभी-कभी जी करता है की भाग जाऊं मैं , इस खुबसूरत ,रंगीन , चंचल शहर से !! दो उदास आँखे .....निहारती रहती है बंद कमरे की उदास छत को ! . ..लेकिन भागुंगी भी कहाँ ? कौन है भला , जो इस सुन्दर सी पृथ्वी पर करता होगा मेरी प्रतीक्षा ? ..... किरण "मीतू" !!

    मेरा बचपन - दुनिया परियो की !

    मेरा बचपन - दुनिया परियो की !
    प्रकृति की गोद में बिताये बचपन की मधुर स्मृतियाँ बार-बार मन को उसी ओर ले जाती है ! मानव जीवन में होने वाली हर बात मुझे प्रकृति से जुडी नज़र आती है तथा मैं मानव जीवन तथा प्रकृति में समीकरण बनाने का प्रयास करती हूँ !....किरण "मीतू

    कविता-मेरी संवेदना !!

    कविता-मेरी संवेदना !!
    वेदना की माटी से , पीड़ा के पानी से , संवेदनाओ की हवा से , आँसूवो के झरनों से ! कोमल मन को जब लगती है चोट , निकलता है कोई गीत , और बनती है कोई कविता !! ..... मीतू !!
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