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- कोई तो होता ,
जो रस्मो रिवाज़ों से हटकर भी मेरा साथ देता ,
जो गुनगुनाता मेरे एहसासो को ,
शब्दों से परे भी सुनता मेरे ज़ज़्बातो को ,
कोई तो होता ,
जो बारिशो में फिक्रमंद होते हुए
मेरे लिए सिर्फ छतरी ही न लाता
बल्कि मेरे साथ भींगता वो फुहारों में !
कोई तो होता ,
जो गुणा -भाग-जोड़ -घटाना -हासिल छोड़कर
तितलियों के परो पर रखे हुए
रंगीन सपनो के पीछे
मेरे साथ दौड़ता -भागता !
कोई तो होता ,
रस्मो रिवाजो से परे भी मेरे साथ होता !!
______ किरण !
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कपास के पतली बारीक तंतुओं जैसे, धवल बादल से,
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आखिर क्यों है
फिर भी तुम पूछते हो तो लो सुनो -
7:05 p.m. -- 14/11/2014
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